आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू, प्रशासन ने तेज की तैयारियां..

आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू, प्रशासन ने तेज की तैयारियां..

 

 

उत्तराखंड: चीन सीमा से सटे पवित्र आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा को लेकर इस बार भी तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रशासनिक स्तर पर संकेत मिले हैं कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो यात्रा 1 मई से शुरू कर दी जाएगी। इसी दिन से श्रद्धालुओं के लिए इनर लाइन परमिट जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी। यात्रा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए एसडीएम आशीष जोशी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी, होमस्टे संचालक और टैक्सी यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में यात्रा मार्गों की स्थिति सुधारने, बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए। स्थानीय स्तर पर यात्रा को और सुगम बनाने की मांगें भी सामने आईं। व्यास टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष प्रवेश नबियाल ने ओल्ड लिपुपास मार्ग से भी कैलाश दर्शन की अनुमति देने की बात उठाई। इस पर प्रशासन ने मामले को उच्च स्तर पर रखने का आश्वासन दिया है।

फर्जी परमिट पर सख्ती..

पिछले वर्ष सामने आए फर्जी परमिट के मामलों को देखते हुए इस बार प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों ने सभी सीएससी सेंटर संचालकों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या होता है इनर लाइन परमिट..

इनर लाइन परमिट (ILP) एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है। यह परमिट भारतीय नागरिकों को देश के भीतर स्थित संवेदनशील या संरक्षित क्षेत्रों विशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नजदीक सीमित अवधि के लिए यात्रा की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में आवाजाही को नियंत्रित करना और सुरक्षा बनाए रखना है। इसका कानूनी आधार ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873’ में निहित है।

कैसे पहुंचे आदि कैलाश..

आदि कैलाश यात्रा के लिए श्रद्धालु रेल, हवाई और सड़क मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्री पहले काठगोदाम पहुंचते हैं, जबकि हवाई मार्ग से पंतनगर एयरपोर्ट या पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद सड़क मार्ग से पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी होते हुए कुटी गांव के रास्ते आदि कैलाश पहुंचा जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार भी प्रशासन यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सहज बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

 

 

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