ऋषिकेश में गंगा तटों का बदलेगा स्वरूप, 85 करोड़ की परियोजना पर शुरू हुआ काम..

ऋषिकेश में गंगा तटों का बदलेगा स्वरूप, 85 करोड़ की परियोजना पर शुरू हुआ काम..

 

उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक और योग नगरी ऋषिकेश में गंगा तटों के विकास को लेकर एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य शुरू हो गया है। तीर्थनगरी के प्रमुख घाटों को आधुनिक स्वरूप देने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से त्रिवेणी घाट, दत्तात्रेय घाट और नाव घाट क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत करीब 800 मीटर लंबे घाट क्षेत्र को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा, जिससे धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एकीकृत शहरी अवसंरचना विकास योजना के अंतर्गत शुरू किए गए इस कार्य पर लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा तटों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है। विशेष रूप से मानसून के दौरान गंगा के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को देखते हुए घाटों की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं।

हर वर्ष बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए घाटों की ऊंचाई बढ़ाने और उन्हें अधिक मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना के तहत मौजूदा घाट संरचनाओं को लगभग दो मीटर तक ऊंचा किया जाएगा ताकि सामान्य बाढ़ की स्थिति में भी घाट सुरक्षित और उपयोगी बने रहें। निर्माण एजेंसी को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजना के पहले चरण में घाटों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बाढ़ के जोखिम से राहत मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्य भविष्य में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

परियोजना के तहत त्रिवेणी घाट के आरती स्थल का विशेष रूप से पुनर्निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए इसे बहु-स्तरीय स्वरूप दिया जाएगा। नई डिजाइन के अनुसार गंगा आरती के आयोजन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर दृश्यता और सुविधाएं मिल सकेंगी। जलस्तर कम होने की स्थिति में भी धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घाट परिसर में बैठने की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर रेलिंग, मार्ग और अन्य आवश्यक संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टॉयलेट ब्लॉक और चेंजिंग रूम बनाए जाने की योजना है, जिससे उन्हें अधिक सुविधा और गोपनीयता मिल सके।

इसके साथ ही घाट क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए आवश्यक भवनों और कार्यालयों का भी निर्माण किया जाएगा। गंगा से जुड़े धार्मिक आयोजनों के संचालन के लिए समर्पित स्थान विकसित किए जाएंगे। साथ ही, नियमानुसार सीमित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी निर्धारित क्षेत्र चिन्हित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश के घाटों की पहचान और अधिक भव्य रूप में सामने आएगी। इससे न केवल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह परियोजना ऋषिकेश को आधुनिक सुविधाओं और आध्यात्मिक विरासत के संतुलित संगम के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

 

 

 

Related Posts

पहाड़ का वह सपूत जिसने दुनिया में लहराया भारत का परचम, जसपाल राणा की प्रेरक कहानी..

पहाड़ का वह सपूत जिसने दुनिया में लहराया भारत का परचम, जसपाल राणा की प्रेरक कहानी..   उत्तराखंड: भारतीय खेल जगत ने 12 जून 2026 को अपना एक अनमोल सितारा…

हल्द्वानी बनेगा खेल विमर्श का केंद्र, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आज होगा आगाज़..

हल्द्वानी बनेगा खेल विमर्श का केंद्र, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आज होगा आगाज़..     उत्तराखंड: उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और युवाओं में खेल संस्कृति…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *