पहाड़ का वह सपूत जिसने दुनिया में लहराया भारत का परचम, जसपाल राणा की प्रेरक कहानी..

पहाड़ का वह सपूत जिसने दुनिया में लहराया भारत का परचम, जसपाल राणा की प्रेरक कहानी..

 

उत्तराखंड: भारतीय खेल जगत ने 12 जून 2026 को अपना एक अनमोल सितारा खो दिया। निशानेबाजी की दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, हर किसी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लेकिन जसपाल राणा केवल एक खिलाड़ी नहीं थे, वे उस सपने का नाम थे जिसने सीमित संसाधनों के बीच विश्व मंच पर भारत का परचम लहराया।

उत्तरकाशी की वादियों से शुरू हुआ सफर

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा को निशानेबाजी की पहली सीख अपने पिता नारायण सिंह राणा से मिली। उनके पिता सीमा सुरक्षा बल (BSF) में अधिकारी थे और शूटिंग के प्रति गहरी रुचि रखते थे। उसी जुनून ने जसपाल के भीतर भी एक चैंपियन को जन्म दिया। यह वह दौर था जब भारत में शूटिंग खेल को आज जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। आधुनिक रेंज, उपकरण और प्रशिक्षण संसाधनों की कमी थी, लेकिन जसपाल ने अपनी मेहनत, अनुशासन और अदम्य आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को पीछे छोड़ दिया।

18 साल की उम्र में जीता एशियाई स्वर्ण

साल 1994 भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। जापान के हिरोशिमा में आयोजित एशियाई खेलों में महज 18 वर्षीय जसपाल राणा ने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गर्व का अवसर दिया। इस जीत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और वे भारत के उभरते हुए सुपरस्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदकों की झड़ी लगती गई और जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के पर्याय बन गए। जसपाल राणा राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल थे।

एशियाई खेलों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में कुल 23 पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। वर्ष 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर इतिहास रच दिया। साउथ एशियन फेडरेशन (SAF) गेम्स में भी उनका दबदबा देखने को मिला, जहां 1995 और 1999 में उन्होंने आठ-आठ स्वर्ण पदक जीतकर एक अनोखा रिकॉर्ड कायम किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाने वाले जसपाल राणा को भारत सरकार ने कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। वर्ष 1994 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और 1997 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया। ये सम्मान केवल उनकी उपलब्धियों का प्रमाण नहीं थे, बल्कि उस समर्पण और संघर्ष की भी पहचान थे जिसने उन्हें खेल जगत की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

खिलाड़ी से कोच बने, तैयार किए नए चैंपियन

प्रतियोगी शूटिंग से दूरी बनाने के बाद भी जसपाल राणा का खेल के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने अपना पूरा अनुभव युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में लगा दिया। भारतीय जूनियर पिस्टल टीम के मुख्य कोच के रूप में उन्होंने कई प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनकी कोचिंग का सबसे बड़ा उदाहरण युवा निशानेबाज मनु भाकर रहीं। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा और इस सफलता के पीछे जसपाल राणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मनु उन्हें अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानती थीं। युवा खिलाड़ियों को नई दिशा देने में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

अचानक थम गया एक चमकता सितारा

12 जून 2026 में जसपाल राणा आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ म्यूनिख से लौट रहे थे, तभी यात्रा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। दिल्ली पहुंचने पर जांच में हृदय संबंधी गंभीर समस्या का पता चला। उनका उपचार और सर्जरी भी हुई, लेकिन 12 जून को आए दिल के दौरे और कार्डियक रप्चर जैसी गंभीर स्थिति के कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने पूरे खेल जगत को स्तब्ध कर दिया। देशभर से खिलाड़ियों, कोचों, राजनीतिक नेताओं और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

हमेशा याद रहेगा जसपाल राणा का नाम

जसपाल राणा सिर्फ एक शूटर नहीं थे, बल्कि भारतीय खेलों में उत्कृष्टता, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक थे। उन्होंने यह साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो पहाड़ों की छोटी-सी बस्ती से निकलकर भी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर इतिहास रचा जा सकता है। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय निशानेबाजी में उनका नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। आज जब पूरा देश जसपाल राणा को एशियाई खेलों के स्वर्ण विजेता, अर्जुन पुरस्कार व द्रोणाचार्य सम्मान के लिए याद कर रहा है, तब उत्तराखंड उन्हें उस युवा चेहरे के रूप में भी याद कर रहा है, जिसके लिए गढ़वाल के लोकसम्राट नरेन्द्र सिंह नेगी ने पूरा गीत रच डाला था। दरअसल यह सिर्फ प्रशस्ति गीत नहीं था, बल्कि यह पहाड़ की बेचैनी की कहानी भी थी। ‘बंदूक्या जसपाल राणा’ की कहानी उतनी ही दिलचस्प है, जितनी उसकी लोकप्रियता।

आपको बता दे कि लोक प्रचलित विवरणों के अनुसार नरेन्द्र सिंह नेगी एक कार्यक्रम के सिलसिले में पौड़ी जिले के असवालस्यूं की ओर जा रहे थे। रास्ते में लोगों से बातचीत के दौरान वन्यजीवों और आदमखोर बाघों के आतंक की चर्चा छिड़ी। ग्रामीणों ने मजाकिया, लेकिन उम्मीद भरे अंदाज में कहा कि अगर जसपाल राणा जैसा निशानेबाज यहां आ जाए तो समस्या का समाधान हो जाए। यही प्रसंग बाद में गीत की मूल प्रेरणा बना। यानी यह गीत केवल एक शूटर की उपलब्धियों का गुणगान ही नहीं था, बल्कि उस दौर के पहाड़ की सामाजिक मनःस्थिति का भी दस्तावेज था, जहां लोग अपने बीच से निकले एक विश्वस्तरीय खिलाड़ी में असाधारण क्षमता और उम्मीद देखते थे।जसपाल राणा के निधन के बाद इंटरनेट मीडिया पर हजारों लोग इस गीत को साझा कर रहे हैं। शायद यही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है कि जब उसकी कहानी इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि लोगों की स्मृतियों और गीतों में भी जीवित रहे। जसपाल राणा ने निशानेबाजी में तो भारत को गौरव दिलाया, लेकिन ‘बंदूक्या जसपाल राणा’ ने उन्हें अमर कर दिया।

 

 

 

Related Posts

हल्द्वानी बनेगा खेल विमर्श का केंद्र, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आज होगा आगाज़..

हल्द्वानी बनेगा खेल विमर्श का केंद्र, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आज होगा आगाज़..     उत्तराखंड: उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और युवाओं में खेल संस्कृति…

देहरादून IMA से पहली बार पासआउट हुईं 9 महिला अफसर, सेना में संभालेंगी जिम्मेदारी..

देहरादून IMA से पहली बार पासआउट हुईं 9 महिला अफसर, सेना में संभालेंगी जिम्मेदारी..         उत्तराखंड: देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) ने शनिवार को एक ऐतिहासिक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *