RTE भुगतान में देरी से हल्द्वानी के निजी स्कूल परेशान, एक साल से अटकी करोड़ों की प्रतिपूर्ति..

RTE भुगतान में देरी से हल्द्वानी के निजी स्कूल परेशान, एक साल से अटकी करोड़ों की प्रतिपूर्ति..

 

 

उत्तराखंड: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे निजी विद्यालयों को समय पर सरकारी प्रतिपूर्ति नहीं मिलने से हल्द्वानी क्षेत्र के स्कूल आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन पिछले सत्र की फीस प्रतिपूर्ति का बड़ा हिस्सा अब तक जारी नहीं हो पाया है। इससे विद्यालय संचालकों में नाराजगी बढ़ रही है और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारी के अनुसार हल्द्वानी ब्लॉक के 300 से अधिक निजी विद्यालयों को आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति पिछले लगभग एक वर्ष से पूरी तरह प्राप्त नहीं हुई है। स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से 12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी लंबित है, जबकि नियमानुसार हर छह महीने में भुगतान किया जाना चाहिए।

हल्द्वानी क्षेत्र के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत आठ हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वारा विद्यालयों को प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाता है। हालांकि समय पर भुगतान न होने के कारण स्कूलों को शिक्षकों के वेतन, संचालन खर्च और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने में कठिनाई हो रही है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन (PSA) का दावा है कि कई विद्यालयों का बकाया दो लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। एसोसिएशन का कहना है कि लगातार देरी से छोटे और मध्यम स्तर के निजी विद्यालयों पर सबसे अधिक आर्थिक दबाव पड़ रहा है। उनका आरोप है कि नए सत्र में भी भुगतान प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है।

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर भुगतान का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। नियमों के अनुसार प्रत्येक छह माह में प्रतिपूर्ति जारी होनी चाहिए, ताकि विद्यालयों के संचालन पर असर न पड़े। लंबे समय से भुगतान लंबित रहने से कई स्कूल वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) पूरा होने के बाद ही संबंधित विद्यालयों को धनराशि जारी की जाती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाल के महीनों में शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी भवन गणना और विशेष पुनरीक्षण (SIR) जैसे कार्यों में लगाए जाने के कारण सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे भुगतान में देरी हुई।

विभाग का कहना है कि पिछले शैक्षणिक सत्र की पहली छमाही का बजट जारी होने के बाद सत्यापन पूरा करने वाले लगभग 20 से 25 विद्यालयों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं दूसरी छमाही की प्रतिपूर्ति और शेष विद्यालयों के भुगतान की प्रक्रिया अभी जारी है। अधिकारियों का दावा है कि सत्यापन रिपोर्ट पूरी होते ही बाकी विद्यालयों को भी चरणबद्ध तरीके से धनराशि जारी कर दी जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी विद्यालय का भुगतान जानबूझकर नहीं रोका जा रहा है। सभी दावों की जांच पूरी होने के बाद बजट उपलब्ध होते ही राशि जारी कर दी जाएगी। हालांकि विद्यालय संचालकों का मानना है कि यदि भविष्य में भी भुगतान में इसी तरह देरी होती रही तो निजी विद्यालयों के लिए आरटीई के तहत शिक्षा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आरटीई योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में समय पर प्रतिपूर्ति न मिलने से जहां निजी विद्यालयों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है, वहीं योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

 

 

 

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