PWD के रिटायर्ड इंजीनियर की कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में हाईकोर्ट सख्त..

PWD के रिटायर्ड इंजीनियर की कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में हाईकोर्ट सख्त

 

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत पर राज्य सरकार और सतर्कता विभाग (विजिलेंस) से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है। न्यायालय ने सरकार को इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

अदालत ने जताई जांच की प्रगति पर चिंता

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायत किए जाने के काफी समय बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। यह भी कहा गया कि पूर्व में न्यायालय ने सरकार से इस मामले में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन लंबे समय बीतने के बावजूद शिकायतकर्ता को यह नहीं बताया गया कि मामले में जांच किस चरण में है। याचिकाकर्ता का कहना था कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी न तो सीधे उपलब्ध कराई गई और न ही किसी अन्य माध्यम से उन्हें अवगत कराया गया।याचिका के अनुसार, देहरादून निवासी जितेंद्र सिंह ने अक्टूबर 2023 में विजिलेंस विभाग को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि लोक निर्माण विभाग के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर ने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत देने के बाद लंबे समय तक उन्हें विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की प्रगति रिपोर्ट या जांच संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

आरटीआई से भी नहीं मिली जानकारी..

जांच की स्थिति जानने के लिए शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत भी जानकारी मांगी थी। हालांकि, उनका दावा है कि विजिलेंस विभाग ने सूचना देने से इनकार कर दिया। विभाग ने यह कहते हुए जानकारी उपलब्ध नहीं कराई कि संबंधित प्रावधानों के तहत वह इस मामले में सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है।इसके बाद शिकायतकर्ता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए जनहित याचिका दायर की और अदालत से अनुरोध किया कि सरकार और विजिलेंस विभाग को शिकायत पर हुई कार्रवाई और जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने के निर्देश दिए जाएं। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, जांच किस स्तर पर है और शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट पर न्यायालय आगे की कार्रवाई तय करेगा। इस मामले पर प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

 

 

Related Posts

केदारनाथ में बिजली व्यवस्था होगी चाक-चौबंद, सोनप्रयाग से धाम तक 33 केवी लाइन को मंजूरी..

केदारनाथ में बिजली व्यवस्था होगी चाक-चौबंद, सोनप्रयाग से धाम तक 33 केवी लाइन को मंजूरी..   उत्तराखंड: केदारनाथ धाम में बिजली की आपूर्ति को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की…

कण्वाश्रम की विरासत को राष्ट्रीय सम्मान, ‘भरत से भारतवर्ष’ को मिला प्रथम पुरस्कार..

कण्वाश्रम की विरासत को राष्ट्रीय सम्मान, ‘भरत से भारतवर्ष’ को मिला प्रथम पुरस्कार..     उत्तराखंड: कण्वाश्रम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने वाली पुस्तक ‘कण्वाश्रम-भरत से भारतवर्ष’…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *