देवराड़ा से जारी हुआ नंदादेवी लोकजात यात्रा का दिन पट्टा, सितंबर में निकलेगी ऐतिहासिक यात्रा..

देवराड़ा से जारी हुआ नंदादेवी लोकजात यात्रा का दिन पट्टा, सितंबर में निकलेगी ऐतिहासिक यात्रा..

 

 

उत्तराखंड: नंदादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा से वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली नंदादेवी लोकजात यात्रा का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। बधाण क्षेत्र के सयानों की बैठक में यात्रा की तिथियों और व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम निर्णय लिया गया। इस बार यात्रा 5 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 तक चलेगी। बैठक में तय किया गया कि मां नंदादेवी की डोली परंपरागत मार्ग से होते हुए वेदनी बुग्याल तक जाएगी। यहां विशेष पूजा-अर्चना और कैलाश विदाई की धार्मिक परंपरा पूरी करने के बाद डोली वापस सिद्धपीठ देवराड़ा लौटेगी। बुधवार को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में मंदिर समिति अध्यक्ष भूवन हटवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें केंद्रीय समिति मां नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण के अध्यक्ष सुशील रावत और सचिव पृथ्वीपाल सिंह बुटोला समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में यात्रा की तैयारियों, पड़ावों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित नंदादेवी राजजात यात्रा को देखते हुए वर्ष 2026 की लोकजात यात्रा को भी विशेष स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।समिति के अनुसार, थराली, देवराड़ा, कुलसारी और वांण में हुई बैठकों के बाद यात्रा कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है। इसके साथ ही कुरूड़ के गौड़ ब्राह्मणों से विचार-विमर्श के बाद देवराड़ा से दिन पट्टा जारी किया गया है। यात्रा कार्यक्रम में कुछ आंशिक बदलाव भी किए गए हैं।

18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी डोली

लोकजात यात्रा के दौरान मां नंदादेवी की डोली 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। यहां सप्तमी के अवसर पर विशेष पूजा होगी और मां नंदादेवी को कैलाश विदाई देने की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद डोली वापसी यात्रा शुरू करेगी और 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। देवराड़ा पहुंचने के बाद धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मां नंदादेवी की डोली को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा, जहां वह अगले छह माह तक विराजमान रहेंगी।

नंदादेवी लोकजात यात्रा 2026 का कार्यक्रम

5 सितंबर: कुरूड़ से यात्रा प्रस्थान, रात्रि विश्राम चरबंग
6 सितंबर: चरबंग से मदकोट
7 सितंबर: मदकोट से उस्तोली
8 सितंबर: उस्तोली से भेटी
9 सितंबर: भेटी से सोल डुंग्री
10 सितंबर: डुंग्री से सूना
11 सितंबर: सूना से थराली होते हुए चेपड़ो
12 सितंबर: चेपड़ो से धरातल्ला
13 सितंबर: धरातल्ला से इच्छोली
14 सितंबर: इच्छोली से फल्दियागांव
15 सितंबर: फल्दियागांव से पिलखड़ा होते हुए मुंदोली
16 सितंबर: मुंदोली से लोहाजंग होते हुए वांण
17 सितंबर: वांण से गैरोली पातल
18 सितंबर: गैरोली पातल से वेदनी बुग्याल, विशेष पूजा और कैलाश विदाई

वापसी यात्रा कार्यक्रम

18 सितंबर: वेदनी से बांक गांव
19 सितंबर: बांक गांव से ल्वाणी
20 सितंबर: ल्वाणी से उलंग्रा
21 सितंबर: उलंग्रा से बेराधार
22 सितंबर: बेराधार से गोठिंड़ा
23 सितंबर: गोठिंड़ा से कुराड़
24 सितंबर: कुराड़ से ढुंगाखोली
25 सितंबर: ढुंगाखोली से भेटा होते हुए सिद्धपीठ देवराड़ा आगमन

देवराड़ा पहुंचने के बाद मां नंदादेवी की डोली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी और उन्हें मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा।

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