एक्सप्रेसवे पर मिट्टी कटान का बनेगा प्राकृतिक कवच, सड़क किनारे बांस लगाने की तैयारी..

एक्सप्रेसवे पर मिट्टी कटान का बनेगा प्राकृतिक कवच, सड़क किनारे बांस लगाने की तैयारी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारों को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए बांस के पौधे लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। उत्तराखंड बांस एवं फाइबर विकास बोर्ड ने इस संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को प्रस्ताव भेजा है। बोर्ड का मानना है कि सड़क किनारे बांस लगाने से बारिश के दौरान होने वाले मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

बारिश में मिट्टी के कटाव पर लगेगी रोक

बोर्ड ने एक्सप्रेसवे के किनारे स्थानीय प्रजातियों के बांस लगाने का सुझाव दिया है। अधिकारियों के अनुसार बांस की जड़ें कुछ वर्षों में जमीन पर मजबूत पकड़ बना लेती हैं। इससे तेज बारिश के दौरान मिट्टी के बहने की समस्या को कम किया जा सकता है।पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क किनारों पर मिट्टी का कटाव और भूस्खलन बड़ी चुनौती है। कई बार सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने से मार्ग को नुकसान पहुंचता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क किनारे बांस का पौधरोपण प्राकृतिक सुरक्षा कवच के तौर पर काम कर सकता है। बांस के पौधे सिर्फ मिट्टी संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। सड़क किनारे बांस के घने झुरमुट वाहनों से होने वाले शोर को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं। इसके साथ ही हरित क्षेत्र बढ़ने से आसपास के वातावरण की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।बांस के जंगल कई पशु-पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण भी उपलब्ध कराते हैं। इसके चलते एक्सप्रेसवे के आसपास जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।

तेजी से बढ़ता है बांस, लंबे समय तक मिलता है फायदा

बांस को तेजी से बढ़ने वाली वनस्पतियों में शामिल किया जाता है। एक बार पौधे स्थापित होने के बाद इनसे लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है। कटाई के बाद बांस दोबारा तेजी से विकसित होने की क्षमता रखता है, जिससे इसे टिकाऊ संसाधन के रूप में देखा जाता है। बोर्ड का मानना है कि बांस के पौधों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लगाया जाए तो इनके रखरखाव पर भी अपेक्षाकृत कम खर्च आएगा। यही वजह है कि बांस को कई जगह ‘ग्रीन गोल्ड’ के नाम से भी जाना जाता है।यदि NHAI की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर बांस का रोपण किया जाता है, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। बांस से जुड़े उत्पादों और इसकी खेती को बढ़ावा मिलने पर ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है। बोर्ड का उद्देश्य सड़क सुरक्षा, मिट्टी संरक्षण, पर्यावरण और रोजगार इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़कर बांस के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

 

 

 

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