खामोशी में साधा अचूक निशाना, अभिनव देशवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया देश का मान..

खामोशी में साधा अचूक निशाना, अभिनव देशवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया देश का मान..

 

 

 

 

उत्तराखंड: कुछ चुनौतियां इंसान की राह मुश्किल जरूर कर सकती हैं, लेकिन अगर हौसला मजबूत हो तो वही चुनौतियां कामयाबी की वजह भी बन जाती हैं। उत्तराखंड के 19 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय पैरा शूटर अभिनव देशवाल ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से इसी बात को साबित किया है। बोलने और सुनने में असमर्थ अभिनव ने निशानेबाजी में ऐसी पहचान बनाई है, जिस पर पूरा प्रदेश गर्व कर रहा है। देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित अभिनव का सफर संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। शांत स्वभाव के अभिनव जब शूटिंग रेंज में उतरते हैं तो उनका पूरा ध्यान सिर्फ लक्ष्य पर होता है। लगातार अभ्यास और एकाग्रता के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक अपनी जगह बनाई है।

अभिनव के पिता मनोज देशवाल शिक्षक हैं। उनका कहना है कि बेटे ने न सिर्फ परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा पेश की है जो किसी चुनौती के बावजूद खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। अभिनव ने यह साबित किया है कि सफलता के लिए परिस्थितियों से ज्यादा जरूरी मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत है। अभिनव की सफलता में उनकी मां संगीता और बहन अंकिता की भूमिका भी अहम रही है। संवाद की सामान्य चुनौतियों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। मां ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया, जबकि बहन अंकिता ने शूटिंग के सफर में उन्हें लगातार प्रेरित किया। खास बात यह है कि अंकिता खुद भी शूटर हैं। भाई-बहन ने एक-दूसरे का साथ देते हुए निशानेबाजी को अपना जुनून बनाया। परिवार के सहयोग ने अभिनव को अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े मंचों पर खुद को साबित करने का आत्मविश्वास दिया।

खामोशी में साधा निशाना, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बनाई पहचान
निशानेबाजी में एकाग्रता, धैर्य और मानसिक मजबूती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अभिनव ने इन्हीं गुणों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। शूटिंग रेंज में पहुंचने के बाद वह पूरी तरह लक्ष्य पर केंद्रित रहते हैं। सुनने और बोलने में असमर्थता उनके प्रदर्शन के सामने कभी बाधा नहीं बनी। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अभिनव ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। टोक्यो डेफलंपिक में दो स्वर्ण पदक जीत चुके अभिनव ने 2026 में एशियन चैंपियनशिप और जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन किया। मूक-बधिर वर्ग में कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके अभिनव अब सामान्य वर्ग की प्रतियोगिताओं में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। उनकी उपलब्धियां न सिर्फ भारतीय शूटिंग के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उत्तराखंड के युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

तीन पिस्टल इवेंट में दिखाते हैं दम
अभिनव देशवाल पिस्टल शूटिंग के तीन प्रमुख इवेंट में हिस्सा लेते हैं। इनमें 10 मीटर एयर पिस्टल, 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल और 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल शामिल हैं। अपनी मेहनत और लगातार बेहतर होते प्रदर्शन के दम पर अभिनव ने साबित किया है कि किसी भी शारीरिक चुनौती से बड़ा इंसान का हौसला होता है। उनकी कहानी उन तमाम खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

 

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