एचआरडीए से 277 गांवों को बाहर करने की मांग तेज, जिला पंचायत बोर्ड ने लगाई मुहर..

एचआरडीए से 277 गांवों को बाहर करने की मांग तेज, जिला पंचायत बोर्ड ने लगाई मुहर..

 

 

उत्तराखंड: जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करते हुए हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। बैठक में जिला पंचायत सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों को प्राधिकरण के दायरे से बाहर किए जाने की मांग करते हुए प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सदस्यों का कहना था कि एचआरडीए के दायरे में आने के बाद गांवों के लोगों को भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति जैसी प्रक्रियाओं में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अपेक्षित विकास का लाभ नहीं मिल पा रहा है। देवपुरा स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित बैठक के दौरान विभिन्न विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान कई सदस्यों ने एचआरडीए की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्राधिकरण की भूमिका केवल नक्शा स्वीकृत करने तक सीमित होकर रह गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के बजाय लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है।

सदस्यों ने कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों को मकान निर्माण के लिए नक्शा पास कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें बार-बार प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। कई मामलों में ग्रामीणों को प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण बिचौलियों या दलालों का सहारा लेना पड़ता है, जिसके चलते उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है। बैठक में यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां शहरी क्षेत्रों से अलग होती हैं। ऐसे में शहरों के लिए बनाई गई नियमावली को गांवों में लागू करना व्यावहारिक नहीं है। सदस्यों का मानना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास कार्यों से जुड़े अधिकार जिला पंचायत को दिए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

जिला पंचायत प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्राधिकरण के माध्यम से अधिकांश विकास कार्य शहरी क्षेत्रों में केंद्रित रहते हैं, जबकि गांवों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पातीं। ग्रामीण क्षेत्रों को एचआरडीए के दायरे में शामिल करने का उद्देश्य समग्र विकास था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ ग्रामीणों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यदि नक्शा स्वीकृति का अधिकार जिला पंचायत को दिया जाता है तो प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बन सकती है। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलेगी और अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं से भी राहत मिलेगी। साथ ही गांवों में विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में मांग की गई कि एचआरडीए के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों की समीक्षा कर उन्हें प्राधिकरण के दायरे से बाहर किया जाए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों के अधिकार स्थानीय निकायों को सौंपने पर भी विचार किया जाए। अब यह प्रस्ताव आगे संबंधित विभागों और शासन स्तर पर भेजा जाएगा, जहां इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जिला पंचायत सदस्यों का मानना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलेगी और आम लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकेगी।

 

 

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