उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, शहरी-आबादी क्षेत्रों की जमीनों का होगा आधुनिक सर्वे..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में शहरी और ग्रामीण आबादी क्षेत्रों की जमीन का रिकॉर्ड अब आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए ‘उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। नई व्यवस्था के तहत आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक तकनीक से सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें ड्रोन के जरिए हवाई सर्वे, जमीनी स्तर पर सत्यापन और GIS तकनीक को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जमीन और संपत्तियों से जुड़ा अधिक सटीक डिजिटल भू-स्थानिक रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। नई नियमावली लागू होने के बाद राजस्व अभिलेखों में दर्ज आबादी क्षेत्रों की भूमि का सर्वे कर संपत्तियों की स्थिति को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाना है। इस व्यवस्था से गांवों में चल रही स्वामित्व योजना की तरह शहरी और अन्य आबादी क्षेत्रों के संपत्ति मालिकों को भी अपनी जमीन और भवन से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।
जमीन के विवाद कम होने की उम्मीद
सटीक डिजिटल भू-डेटा तैयार होने से जमीन की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। संपत्ति की वास्तविक स्थिति और सीमाओं का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर स्वामित्व से जुड़े विवादों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा सरकार और स्थानीय निकायों को शहरी नियोजन, भूमि उपयोग और भविष्य की विकास योजनाएं तैयार करने में भी डिजिटल डेटा का लाभ मिलेगा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा, नरेंद्र नगर, किच्छा और भगवानपुर नगर पालिका क्षेत्रों में भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। इसके तहत ड्रोन सर्वे के साथ जमीन का भौतिक सत्यापन और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों की जांच की जा रही है। सर्वे और अभिलेखों के परीक्षण के बाद संबंधित भू-स्वामियों को नोटिस देकर उनका पक्ष लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आपत्तियों और दावों की सुनवाई के बाद पात्र संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे। नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य आबादी क्षेत्रों में भी आधुनिक सर्वे के जरिए डिजिटल भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाने की योजना है।





