उत्तराखंड में राफ्टिंग के नए नियम लागू, कैबिनेट ने संशोधन नियमावली को दी हरी झंडी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में रिवर राफ्टिंग एवं व्हाइट वॉटर कयाकिंग (संशोधन) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में राफ्टिंग संचालन पर निगरानी और सख्त होगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। नई नियमावली के तहत अधिसूचित नदियों में बिना वैध अनुमति के राफ्टिंग या कयाकिंग गतिविधि संचालित करने पर संबंधित संचालक की राफ्ट तत्काल जब्त की जाएगी। इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अवैध संचालन पर पूरी तरह रोक लगाना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
60 वर्ष तक के गाइडों को मिलेगा अवसर
संशोधित नियमावली में राफ्टिंग गाइडों के लिए आयु सीमा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब अधिकतम 60 वर्ष तक के व्यक्ति रिवर गाइड या सेफ्टी कयाकर के रूप में कार्य कर सकेंगे। हालांकि 50 वर्ष से अधिक आयु के गाइडों और सेफ्टी कयाकरों को हर वर्ष राजकीय मेडिकल बोर्ड से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके माध्यम से सरकार अनुभवी गाइडों के अनुभव का लाभ भी लेना चाहती है और सुरक्षा मानकों से भी कोई समझौता नहीं करना चाहती। नई नियमावली के अनुसार रिवर राफ्टिंग और व्हाइट वॉटर कयाकिंग का संचालन केवल उन्हीं गाइडों द्वारा किया जा सकेगा, जिनके पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से प्राप्त कम से कम पांच वर्ष की अवधि का वैध लाइसेंस होगा। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित और अनुभवी गाइडों की नियुक्ति से दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और पर्यटकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
लाइसेंस नवीनीकरण के लिए तय समय सीमा
राफ्टिंग संचालकों को प्रत्येक सीजन शुरू होने के 45 दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क जमा कर अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होगा। यदि कोई संचालक बिना नवीनीकरण के राफ्टिंग गतिविधि संचालित करता पाया जाता है तो उसकी प्रत्येक राफ्ट पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। दोबारा नियमों का उल्लंघन करने पर उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकेगा। सरकार ने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई नए प्रावधान लागू किए हैं। प्रत्येक राफ्टिंग ट्रिप में गाइडों के साथ आवश्यक संख्या में राफ्ट और सुरक्षा कयाक की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। सभी पर्यटकों और गाइडों को राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित हेलमेट और लाइफ जैकेट पहनना होगा। यदि राफ्टिंग के दौरान कोई गाइड या पर्यटक बिना हेलमेट अथवा लाइफ जैकेट के पाया जाता है तो संचालक पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं राफ्ट में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने यानी ओवरलोडिंग की स्थिति में भी 5 हजार रुपये का दंड निर्धारित किया गया है।
गाइडों की पहचान और निगरानी होगी मजबूत
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक रिवर गाइड के परिचय पत्र का नवीनीकरण हर पांच वर्ष में अनिवार्य होगा। इसके लिए परिचय पत्र की वैधता समाप्त होने से कम से कम 90 दिन पहले आवेदन करना होगा। यदि कोई गाइड एक फर्म छोड़कर दूसरी फर्म से जुड़ता है तो उसका पुराना परिचय पत्र स्वतः अमान्य माना जाएगा और नई प्रक्रिया के तहत पहचान पत्र जारी कराया जाएगा। इससे गाइडों का अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने में आसानी होगी। राफ्टिंग या कयाकिंग के दौरान पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार, धोखाधड़ी, लापरवाही अथवा दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी सिद्ध होने पर संबंधित संचालक का लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा। वहीं संबंधित रिवर गाइड का परिचय पत्र भी निरस्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बिना वैध परिचय पत्र के राफ्टिंग संचालन करने वाले गाइड पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि परिचय पत्र का समय पर नवीनीकरण न कराने पर 5 हजार रुपये का दंड देना होगा।
गो-प्रो कैमरे और खराब उपकरणों पर भी नियम
संशोधित नियमावली में राफ्टिंग के दौरान सुरक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है। रिवर गाइड द्वारा राफ्टिंग के समय गो-प्रो कैमरे का उपयोग करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं खराब, क्षतिग्रस्त अथवा निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने पर 5 हजार रुपये का दंड निर्धारित किया गया है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) की पूर्व अनुमति के बिना यदि कोई संचालक अपना लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को हस्तांतरित करता है तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी संचालन और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि संशोधित नियमावली का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि राज्य में साहसिक पर्यटन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। स्पष्ट नियमों और जवाबदेही तय होने से पर्यटकों का विश्वास बढ़ेगा, वैध संचालकों को बेहतर अवसर मिलेंगे और राज्य के पर्यटन उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।





