पर्यटन विभाग का बड़ा फैसला, होमस्टे के लिए पहले नक्शा फिर पंजीकरण जरूरी..

पर्यटन विभाग का बड़ा फैसला, होमस्टे के लिए पहले नक्शा फिर पंजीकरण जरूरी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे होमस्टे व्यवसाय को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। टिहरी गढ़वाल जिले में अब होमस्टे संचालन के लिए भवन का स्वीकृत नक्शा होना अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद बिना अनुमोदित नक्शे के कोई भी व्यक्ति होमस्टे का संचालन नहीं कर सकेगा। पर्यटन विभाग की ओर से जारी इस नई व्यवस्था के तहत होमस्टे निर्माण और संचालन को नियमन के दायरे में लाया गया है। इसके अनुसार, राष्ट्रीय या राज्य राजमार्गों के किनारे बनने वाले होमस्टे के नक्शे को जिला विकास प्राधिकरण से स्वीकृति लेनी होगी, जबकि आंतरिक और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होमस्टे के लिए जिला पंचायत से नक्शा पास कराना जरूरी होगा। इच्छुक आवेदकों को संबंधित विभाग में आवेदन करना अनिवार्य किया गया है।

जिले में वर्तमान समय में होमस्टे व्यवसाय तेजी से विस्तार कर रहा है और यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 630 होमस्टे पहले से पंजीकृत हैं। खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो स्वरोजगार के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।

पर्यटन विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में 24 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। इसके साथ करीब एक दर्जन नए आवेदनों की प्रक्रिया बैंक स्तर पर लंबित बताई जा रही है। सरकार की होमस्टे योजना के तहत लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है, जबकि बैंक से अधिकतम 30 लाख रुपये तक का ऋण भी लिया जा सकता है। योजना के तहत होमस्टे में कम से कम छह कमरे और 24 बिस्तरों की व्यवस्था होना जरूरी है। पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के बीच होमस्टे की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, क्योंकि यह उन्हें स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली के करीब रहने का अनुभव देता है। ऐसे में सरकार का यह कदम जहां एक ओर व्यवसाय को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा।

 

 

 

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