450 करोड़ की 10 पेयजल योजनाओं पर बढ़ा कदम, केंद्र की स्वीकृति का इंतजार..

450 करोड़ की 10 पेयजल योजनाओं पर बढ़ा कदम, केंद्र की स्वीकृति का इंतजार..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विभिन्न शहरों और कस्बों में स्वच्छ एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से संचालित होने वाली परियोजनाओं के पहले चरण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। सरकारी स्तर पर तैयार किए गए प्रस्तावों में कुल 10 महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी अनुमानित लागत करीब 450 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्यों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि प्रस्तावों को जल्द स्वीकृति मिल जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

जानकारी के अनुसार राज्य को विश्व बैंक की सहायता से लगभग 1200 करोड़ रुपये की विभिन्न पेयजल योजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति पहले ही प्राप्त हो चुकी है। विश्व बैंक की परियोजना प्रक्रिया के तहत शुरुआती चरण में कुछ योजनाओं को प्राथमिकता देकर उनका कार्य शुरू किया जाता है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने पहले चरण के लिए 10 योजनाओं का चयन करते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजी है। इन परियोजनाओं में देहरादून जनपद की सेलाकुई पेयजल योजना, हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में रामपुर और पाडली गुज्जर पेयजल योजना, बागेश्वर नगर क्षेत्र की पेयजल योजना, रानीपोखरी मौजा और रानीपोखरी ग्रांट क्षेत्र की योजनाएं, नैनीताल जिले की भवाली और भीमताल पेयजल योजनाएं, चमोली जिले की गोपेश्वर पेयजल योजना, हल्द्वानी वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना तथा ऋषिकेश क्षेत्र की पशुलोक परियोजना शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से तेजी से बढ़ती आबादी वाले शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में पेयजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। कई क्षेत्रों में पुरानी पाइपलाइनें, सीमित जलस्रोत और बढ़ती मांग पेयजल आपूर्ति के लिए चुनौती बनी हुई हैं। नई परियोजनाओं के माध्यम से जल संग्रहण, वितरण नेटवर्क के विस्तार और आपूर्ति प्रणाली के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में एक वितरण योजना और नौ नई पेयजल योजनाओं को शामिल किया गया है। इन परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद कार्यों की प्रगति और आवश्यकता के आधार पर अगले चरण में अन्य योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य राज्य के दूरस्थ और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। पेयजल क्षेत्र में होने वाला यह निवेश न केवल बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेगा बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। साथ ही भविष्य में जलापूर्ति संबंधी समस्याओं के समाधान और शहरी विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी यह परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 

 

 

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