भक्ति और परंपरा का संगम: बदरीनाथ धाम में कल खुलेंगे कपाट, गूंजे ‘जय बदरीविशाल’ के जयकारे

उत्तराखंड के पवित्र बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पांडुकेश्वर से भगवान उद्धव, कुबेर और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी विधिवत बदरीनाथ धाम पहुंच गई है। अब 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

इससे पहले नृसिंह मंदिर से धार्मिक परंपराओं के अनुसार भव्य डोली यात्रा निकाली गई। ‘जय बदरीविशाल’ के उद्घोष के बीच आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, गरुड़ की डोली और गाड़ू घड़ा (तेल कलश) यात्रा विधि-विधान के साथ बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर डोली का स्वागत किया और भक्ति में डूबे नजर आए।

मंगलवार को नृसिंह मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल और पुजारी हितेश सती ने पंचांग पूजा संपन्न कर यात्रा का शुभारंभ किया। सुबह करीब 10 बजे सेना के बैंड की मधुर धुनों के साथ डोली यात्रा आगे बढ़ी।

स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक डोली को विदा किया। महिलाओं ने भजन-कीर्तन गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। यात्रा दोपहर में पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर पहुंची, जहां रात्रि विश्राम के बाद बुधवार को डोली बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर गई।

बुधवार को भगवान कुबेर, उद्धव, शंकराचार्य की गद्दी और गाड़ू घड़ा तेल कलश बदरीनाथ धाम पहुंच गए। अब पूरे विधि-विधान के साथ 23 अप्रैल की सुबह कपाटोद्घाटन होगा, जिसके साथ ही बदरीनाथ यात्रा का शुभारंभ हो जाएगा।

श्रद्धालुओं में इस पावन अवसर को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग धाम पहुंचने लगे हैं।

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