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गैरसैंण की जलापूर्ति सुधारने की तैयारी, 122.69 करोड़ की बांध परियोजना को हरी झंडी..

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गैरसैंण की जलापूर्ति सुधारने की तैयारी, 122.69 करोड़ की बांध परियोजना को हरी झंडी..

 

 

उत्तराखंड: गैरसैंण और आसपास के इलाकों में आने वाले वर्षों में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने रामगंगा नदी पर बांध बनाने की परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस योजना पर 122.6891 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन ने परियोजना के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी देने के साथ शुरुआती चरण के लिए 2.454 करोड़ रुपये भी जारी करने की स्वीकृति दी है। यह योजना सीएम पुष्कर सिंह धामी की घोषणा से जुड़ी है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में पानी के भंडारण की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय आबादी को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। शुरुआती धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से उपलब्ध कराई जाएगी। बाद में केंद्र की एसएएससीआई योजना के तहत मिलने वाली राशि से इसका समायोजन किया जाएगा।

32 हजार लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी
सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष पांडे के मुताबिक, रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध की ऊंचाई 35 मीटर होगी। इसके तैयार होने पर वर्ष 2055 तक करीब 32 हजार लोगों की पेयजल जरूरतें पूरी करने का लक्ष्य है। योजना के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। बांध में तीन लाख घन मीटर पानी जमा करने की क्षमता होगी। पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल की दीर्घकालिक जरूरतों को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे गैरसैंण नगर के साथ आसपास के क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

तकनीकी जांच के बाद आगे बढ़ेगा निर्माण
बांध निर्माण शुरू करने से पहले इसकी तकनीकी और भूगर्भीय उपयुक्तता की जांच की जाएगी। बांध और बैराज के डिजाइन को मान्यता प्राप्त संस्था से सत्यापित कराना अनिवार्य होगा। निर्माण स्थल पर मिट्टी और भूगर्भ से जुड़े परीक्षण भी किए जाएंगे, ताकि परियोजना की सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सके। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच प्रयोगशाला से कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त काम की गुणवत्ता परखने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से निरीक्षण भी कराया जाएगा।

नदी के निचले हिस्से के गांवों के लिए भी व्यवस्था
शासन ने स्पष्ट किया है कि बांध बनने की प्रक्रिया में नदी के निचले हिस्से में स्थित गांवों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। निर्माण के दौरान और परियोजना पूरी होने के बाद भी इन गांवों को पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। नदी में न्यूनतम जरूरी जल स्तर बनाए रखने का भी ध्यान रखा जाएगा।परियोजना के बजट और खर्च पर निगरानी रखने के लिए भी शर्तें तय की गई हैं। स्वीकृत राशि में से बचने वाला पैसा वापस करना होगा, जबकि अतिरिक्त काम के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ेगी। योजना की प्रगति की जानकारी शासन को देनी होगी और इसे पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। बजट का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

 

 

 

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