कुंभ-चारधाम यात्राओं में नहीं होगी स्वास्थ्य जांच की कमी, खुलेगा NCDC केंद्र..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में कुंभ, कांवड़ और चारधाम यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), नई दिल्ली की अत्याधुनिक शाखा स्थापित करने के लिए हरिद्वार में एक एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इसके लिए शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। सरकार ने करीब तीन सप्ताह पहले हुई कैबिनेट बैठक में सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी थी। इसके बाद हरिद्वार स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर की कुल 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ जमीन एनसीडीसी को 99 वर्ष की लीज पर देने का निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। हरिद्वार में एनसीडीसी सेंटर बनने से संक्रामक रोगों की निगरानी और उनकी पहचान के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा, कांवड़ मेला और कुंभ जैसे आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में डेंगू, स्वाइन फ्लू, कोरोना, मंकीपॉक्स या किसी नए वायरल संक्रमण के फैलने की स्थिति में बीमारी की जल्द पहचान और उसके नियंत्रण में यह सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दिल्ली और पुणे पर जांच के लिए निर्भरता होगी कम
फिलहाल गंभीर संक्रमण या अज्ञात बीमारी से जुड़े कई नमूनों की उन्नत जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए दूसरे राज्यों की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। हरिद्वार में आधुनिक बायो-सेफ्टी लेवल (BSL) लैब स्थापित होने के बाद जांच की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर तेज होने की संभावना है। इससे संक्रमण की पहचान और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में समय कम लग सकता है।
वन्यजीवों से जुड़े संक्रमण पर भी होगा फोकस
उत्तराखंड के बड़े हिस्से में जंगल होने के कारण पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित एनसीडीसी सेंटर में स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस और रेबीज जैसी बीमारियों से जुड़े मामलों पर अध्ययन और शोध को भी बढ़ावा मिल सकता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार परिसर में सेंटर स्थापित होने से मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी के क्षेत्र में प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिलने की उम्मीद है। बड़े धार्मिक और पर्यटन आयोजनों के दौरान रोगों की निगरानी के लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।





