त्रियुगीनारायण मंदिर में जौ की हरियाली अर्पित, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम..

त्रियुगीनारायण मंदिर में जौ की हरियाली अर्पित, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम..

 

 

 

उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ विकासखंड की सीमांत ग्राम पंचायत त्रियुगीनारायण में पौराणिक परंपराओं के अनुसार हरियाली पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर में आयोजित इस पर्व के दौरान पूरी केदारघाटी लोक संस्कृति और धार्मिक रंग में रंगी नजर आई। ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। धुर्वाष्टमी के अवसर पर मनाए गए हरियाली पर्व के लिए ग्रामीणों ने करीब सात दिन पहले अपने घरों में जौ बोकर हरियाली तैयार की थी। पर्व के दिन इसे विधि-विधान के साथ एकत्र किया गया। इसके बाद वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच ग्रामीण जौ की हरियाली लेकर त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के पुजारी ने हरियाली का पूजन कराया और सबसे पहले भगवान विष्णु के चरणों में इसे अर्पित किया गया। पूजा संपन्न होने के बाद ग्रामीण हरियाली लेकर गांव के अलग-अलग घरों में पहुंचे। उन्होंने परिवारों और बुजुर्गों को हरियाली भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान पौराणिक गीतों, जयकारों और धार्मिक अनुष्ठानों से क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा। हरियाली पर्व को लेकर गांव में सुबह से ही खासा उत्साह देखने को मिला।

भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक

स्थानीय ग्रामीणों का कहना हैं कि हरियाली पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और आपसी भाईचारे से भी जुड़ा हुआ है। जौ की हरियाली को शुभता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के चलते इसे घर-घर पहुंचाने और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। त्रियुगीनारायण में होने वाले प्रसिद्ध वामन द्वादशी मेले में भी जौ की हरियाली का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पर्व के दौरान तैयार की गई हरियाली को मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

वामन अवतार से जुड़ी है मान्यता

हरियाली पर्व को लेकर धार्मिक मान्यता भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार वामन अवतार से कुछ दिन पहले भगवान विष्णु ने माता अदिति और देव कन्याओं को अपने विराट स्वरूप के दर्शन कराए थे। उनके दिव्य स्वरूप से प्रभावित होकर माता अदिति और देव कन्याओं ने भगवान विष्णु को जौ की हरियाली अर्पित की थी। कहा जाता है कि इसी परंपरा के बाद से त्रियुगीनारायण क्षेत्र में भगवान नारायण को सबसे पहले जौ की हरियाली चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। आज भी ग्रामीण इसी धार्मिक मान्यता का पालन करते हुए हरियाली को पहले मंदिर में भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं और इसके बाद इसे घर-घर प्रसाद के रूप में पहुंचाते हैं।

 

 

 

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