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वाइब्रेंट विलेज योजना से सीमावर्ती गांव होंगे गुलजार, बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार..

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वाइब्रेंट विलेज योजना से सीमावर्ती गांव होंगे गुलजार, बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में विकास को रफ्तार देने की तैयारी है। चीन और नेपाल की सीमा से लगे प्रदेश के 91 गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना पर काम चल रहा है। सरकार का जोर इन गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन को रोकने पर भी है। केंद्र की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के पांच जिलों के सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है। इनमें पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले शामिल हैं। योजना के जरिए गांवों की जरूरत के मुताबिक विकास परियोजनाएं तैयार कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की कवायद की जा रही है।

51 गांव पहले चरण में, 40 दूसरे चरण में शामिल

प्रदेश के कुल 91 गांव इस योजना का हिस्सा हैं। इनमें 51 गांवों को पहले चरण में शामिल किया गया था, जबकि दूसरे चरण में 40 नए गांव योजना से जोड़े गए हैं। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय आबादी को अपने गांव में ही बेहतर अवसर मिलेंगे। उत्तराखंड की करीब 658 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसमें लगभग 283 किलोमीटर हिस्सा नेपाल और 375 किलोमीटर चीन सीमा से जुड़ा है। ऐसे में सीमावर्ती गांवों का विकास रणनीतिक और सामाजिक, दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

40 गांवों के लिए 221 करोड़ का प्रस्ताव

ग्राम्य विकास विभाग ने नेपाल सीमा से लगे चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ के 40 गांवों के लिए विकास कार्यों का प्रस्ताव तैयार किया है। इन कार्यों के लिए करीब 221 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। योजना में केवल बुनियादी सुविधाओं तक ही फोकस सीमित नहीं रखा गया है। पर्यटन, स्थानीय आजीविका और कनेक्टिविटी से जुड़े प्रोजेक्ट भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़े और स्थानीय लोगों को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।

गांवों के लिए तैयार होंगी विशेष परियोजनाएं

सरकार ने योजना में शामिल जिलों से चयनित गांवों के लिए पांच-पांच प्रमुख परियोजनाओं की योजना तैयार करने को कहा है। इन परियोजनाओं में स्थानीय जरूरतों के साथ सड़क और अन्य कनेक्टिविटी, मूलभूत सुविधाएं, पर्यटन और रोजगार के साधनों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, योजना के तहत प्रदेश के 91 गांवों के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार कर केंद्र को भेजी गई है। आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए होमस्टे, पर्यटन सेवाओं और अन्य स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

 

 

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